सहकारिता के चुनाव में महिला आरक्षण के मामले को चुनौती दे डाली है। वहीं नए वोटरों से भी वोट का अधिकार छीनने के लिए याचिका डाली है। यह खबर मीडिया की सुर्खियों में है।
बता दें कि उत्तराखंड राज्य देश का पहला ऐसा राज्य बना था जिसमें सहकारिता के बोर्ड में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तय हुआ था। केंद्र की जन विकास व विकासवाद की सोच के अनुपालन में उत्तराखंड सरकार ने बाकायदा कैबिनेट में सहाकारिता में आरक्षण के प्रस्ताव को लाई थी। ऐसे में स्वयं भाजपा का झंडा उठाए सहकारिता के निवर्ततमान अध्यक्ष ने खुले तौर पर एक हिसाब से अपने शीर्ष नेतृत्व से बगावत कर डाली है। कहीं विपक्षी कांग्रेस के हाथों में संजीवनी ना थमा दे।